Maun bolta hai

Maun bolta hai

बर्फ़ पिघलती नहीं मौन की,
ढूँढ रहा ऊष्मा रिश्तों में।

गुपचुप बैठी रहे उदासी,
दर्द लगा रहता रोने में।

गहरे अवसाद से गहरे प्रेम के बेलौस सफ़र पे ले जाती इन पंक्तियों की रचयित्री हैं युवा लेखिका डॉ पूनम यादव। पेशे से प्राध्यापिका पूनम की कविताएँ जहाँ संस्कृति, मानवीयता,वैश्विकता, गाम्भीर्य जैसे आयामों को छूती हैं वहीं इनकी ग़ज़लें इश्क़ के तमाम अनछुए पहलुओं का अनोखा संसार रचती हैं। जहां इन्होंने अपने व्यावसायिक जीवन में "शिक्षक सम्मान 2015" प्राप्त किया, वहीं साहित्यिक जीवन में भी "यादव ...

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